इराक में मारे गये भारतीयों की चर्चा के लिए कांग्रेस ने राज्यसभा में दिया नोटिस

मंगलवार को सुषमा स्वराज ने इराक में गायब हुए भारतीयों की हत्या की खबर दी तो देश में भूचाल सा गया। जी हां, मृतक के परिवारों वालो पर दुखों का पहाड़ टूट गया, ऐसे में उनकी सरकार के प्रति नाराजगी तो जाहिर सी बात है। बता दें कि इराक में 39 भारतीयो को आईएसआईएस ने मारा डाला, जिसके बाद अब सियासत में अपने चरम पर हैं। आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा राज्यसभा में 39 भारतीयों के मारे जाने की सूचना ने पूरे देश को हिला के रख दिया तो वहीं अब कांग्रेस पार्टी इस पर चर्चा की मांग कर रही है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि मामले में चर्चा होनी चाहिए। इस दौरान कांग्रेस की यह भी मांग है कि सरकार ये बताये इस खबर को छिपाया क्यों गया? जहां एक तरफ भारत का सियासी बाजार गर्म हो चुका है, तो वहीं दूसरी तरफ इराक अधिकारियों का कहना है कि भारतीयों को एक साल पहले ही मार डाला गया था।

बताते चलें कि राज्यसभा में अपनी बात रखने के बाद जब सुषमा लोकसभा गई तो वहां कांग्रेसियों ने जमकर हंगामा किया था, जिसके बाद सुषमा कांग्रेस पर भड़कती हुई नजर आई थी। इस दौरान सुषमा ने कहा कि कांग्रेस ने ओछी राजनीति की सारी हदे पार कर दी, शर्म आनी चाहिए इन्हें मौत पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आएं, ऐसे में अब कांग्रेस इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करती हुई नजर आ रही है।

राज्यसभा में कांग्रेस ने की चर्चा की मांग, पीड़ित परिवारोंं को दिया जाए करोड़ो रूपया

इराक में मारे गये भारतीयों के परिजनों को लेकर कांग्रेस ने सरकार से मांग की  है कि वो पीड़ित परिवारों को मुआवजा के तहत 2 करोड़ रूपये दें, ऐसे में इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्यसभा में सरकार को नोटिस भेजा है, जिससे इस पर चर्चा हो सके। हालांकि, सरकार इस पर चर्चा करेगी या नहीं ये तो खैर वक्त ही बताएगा। साथ ही कांग्रेस की मांग यह भी है कि सुषमा स्वराज को सार्वजनिक तौर पर सबसे माफी मांगनी चाहिए, क्योंंकि उन्होंने इस बात को इतने लंबे अर्से से छिपा रखा था।

याद दिला दें कि चार साल पहले जब इन भारतीयों को आईएसआईएस ने बंधक बना लिया था, तब से लेकर सरकार पीड़ित परिवार वालों को यह दिलासा दिलाती रही थी कि उन्हें बचा लिया जाएगा, जबकि इनकी हत्या एक साल पहले ही कर दी गई थी, यही वजह है कि मृतक के परिवार वाले भी सरकार से नाखुश है।