सात उचक्के फिल्म समीक्षा: कमजोर पटकथा और गाली- गलौज का ताना- बाना!

saat uchakkey movie review

रेटिंग: 2.5/5
फिल्म: सात उचक्के
निर्देशक: संजीव शर्मा
संगीत: अभिषेक रे
अभिनेता: मनोज बाजपेयी, के. के. मेनन, अनु कपूर, अनुपम खेर, विजय राज और अदिति शर्मा

बॉलीवुड ने अपनी सफलता का पैमाना गाली को बना लिया है, इसलिए आजकल जो भी फिल्म आ रही है लगभग सभी फिल्मों में खुलकर गलियों की बौछार की जाती है और द्विअर्थी शब्दों की भरमार होती है। फिल्म चाहे कॉमेडी हो या गंभीर सभी में गलियों का भरपूर प्रयोग होता है, यह शायद इसलिए किया जाता है कि सिनेमा वास्तविक लगे जबकि ऐसा कुछ नहीं है। आज भी दर्शक अच्छी पटकथा और अच्छा अभिनय देखने के लिए सिनेमाघरों में जाते हैं ना कि गाली सुनने के लिए। मनोज बाजपेयी की बुधिया सिंह बोर्न टू रन के बाद सात उचक्के आयी है जिसमे गालियों की भरमार है।

कहानी: फिल्म की कहानी पुरानी दिल्ली की है, फिल्म की कहानी सात लोगों के इर्द- गिर्द घुमती है। (saat uchakkey movie review)

कहानी: फिल्म की कहानी पुरानी दिल्ली की है, फिल्म की कहानी सात लोगों के इर्द- गिर्द घुमती है। सतो छोटे- मोटे चोर होते हैं और अपना काम चलाने के लिए चोरियाँ करते हैं। एक दिन हवेली में चोरी करने का प्लान बनता है इसी लिए सतो एक साथ मिलकर काम करना शुरू कर देते हैं। पप्पी (मनोज बाजपेयी) सबका लीडर होता है। सारे काम सभी मिलकर करते हैं। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस इंस्पेक्टर (केके मेनन) उन्हें पकड़ने के लिए अपना अभियान शुरू कर देता है।

अभिनय:

अभिनय: अगर अभिनय की बात की जाये तो सभी अभिनेताओं ने अच्छा अभिनय किया है, मनोज बाजपेयी हर बार की तरह अपने अभिनय का लोहा मानने पर मजबूर कर देते हैं। केके मेनन पुलिस वाले की भूमिका में अच्छे दिखे हैं, और जैसा कि अपनी पिछली फिल्मों के जरिये वह अपने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाते हैं इस बार भी वह इसमें सफल हुए हैं। फिल्म में मनोज बाजपेयी को कड़ी टक्कर दी है केके मेनन ने। अनु कपूर फिल्म में ज्यादा दिखाई नहीं दिए समय- समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है लेकिन जितनी देर दिखे दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खीचने में कामयाब रहे। यही हाल अनुपम खेर का रहा वह भी ज्यादा नहीं देखे हैं फिल्म में लेकिन जितनी देर रहे अच्छा अभिनय किया है। अन्य अभिनेताओं ने भी अच्छा अभिनय किया है।

फिल्म की पटकथा पुरानी और बहुत कमजोर है, अगर फिल्म में कुछ है तो वह बस अभिनय है। अभिनय के दम पर ही फिल्म को थोड़ा- बहुत देखने लायक बनाया जा सका है। अगर संगीत की बात की जाये तो वह भी औसत दर्जे का है जो लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ने में असफल रहा है। निर्देशन भी ठीक- ठाक है, कोई क्या कर सकता है जब फिल्म की पटकथा ही अच्छी ना हो तो।

कुल मिलाकर अगर आप अभिनेताओं का अभिनय देखना चाहते हैं तो इस फिल्म को देख सकते हैं लेकिन अगर आप एक दमदार कहानी की चाहत रखते हैं तो यह फिल्म आपको बहुत निराश कर सकती है। (saat uchakkey movie review)