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त्रिपुरा में पीएम मोदी का बड़ा वार, बोले ‘गणतंत्र नहीं गन-तंत्र में भरोसा रखती है माणिक सरकार’
त्रिपुरा: सूबे में चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। चुनावी माहौल के दौरान राजनीतिक पार्टियां हर एक दांव पेंच आजमाती दिख रही हैं। सूबे में बीजेपी और कांग्रेस के लिए एक ही मुसीबत है, वो ये है कि वहां की सरकार में सेंध करना। बता दें कि त्रिपुरा में कई दशकों से लेफ्टों का शासन रहा है, ऐसे में देश की दो बड़ी पार्टियों के लिए वहां पर राज करना मुश्किल माना जा रहा है। त्रिपुरा में जनता के मूड को बीजेपी के पक्ष में बनाने के लिए पीएम मोदी एक के बाद एक रैली करते हुए नजर आ रहे हैं। आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?
पीएम मोदी त्रिपुरा की एक जनसभा को संबोधित करते हुए सूबे की माणिक सरकार पर जबरदस्त हमला बोला है। जी हां, पीएम मोदी ने हमला बोलते हुए कहा कि त्रिपुरा की सरकार गणतंत्र नहीं गन-तंत्र में भरोसा रखती है। दरअसल, बीजेपी सूबे की सरकार पर ये आरोप लगाती हुई नजर आ रही है कि यहां जनता का शासन नहीं है। मतलब साफ है कि बीजेपी माणिक सरकार पर वार करते हुए त्रिपुरा की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही है।
जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब कम्यूनिस्ट पार्टी के साथ त्रिपुरा की जनता खड़ी होने वाली नहीं है। इसके आगे पीएम मोदी ने कहा कि जनता अब फेयरवल देगी और ऐसा फेयरवल की कभी वापस नहीं आ सकेंगे। बताते चलें कि पीएम मोदी ने इससे पहले भी कहा था कि दुनिया में कम्यूनिस्ट पार्टी का अस्तित्व जरा सा ही बचा है, जोकि अब खत्म हो जाएगा।
बता दें कि त्रिपुरा चुनाव प्रचार करने के लिए बीजेपी ने कई दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई बीजेपी माणिक की किला में सेंध करने में संभव हो पाती है या नहीं? त्रिपुरा में 18 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
माणिक सरकार का दशकों से हैं दबदबा
याद दिला दें कि त्रिपुरा में दशकों से लेफ्ट पार्टी का कब्जा रहा है। सीएम माणिक पिछले दशकों से सीएम बने हुए हैं, ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के लिए ये लड़ाई आसान नहीं मानी जा रही है। याद दिला दें कि पिछले 25 सालों से यहां लेफ्ट पार्टी का शासन है। हालांकि, बीजेपी की निगाहें माणिक की सत्ता को छीनने में है। बतौर सीएम माणिक को त्रिपुरा में बहुत पसंद किया जाता है, ऐसे में माणिक के सामने एक बार फिर अपनी लोकप्रियता को बरकरार रखने की चुनौती है।