इस गांव की महिलाएं गिलास से नहीं बल्कि पति के इस चीज से पीती हैं पानी, जानकर खून खौल जाएगा

आज के इस बदलते दौर में लड़के लड़कियों को एक नजरिये से देखा जाता है. वह दौर गया जब लड़के लड़कियों में लोग अंतर किया करते थे. अब लड़कियां लड़कों से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं. वह उनके साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं. लेकिन कुछ जगहों पर लोग अब भी पुरानी मानसिकता के साथ जी रहे हैं. वह आज भी लड़के-लड़की में भेदभाव करते हैं. हालांकि बदलते वक्त के साथ लोगों की ये मानसिकता बदली है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो लड़की को आगे बढ़ते हुए देखना पसंद नहीं करते. उनका मानना है कि लड़कियों का जन्म नौकरी करने के लिए नहीं बल्कि चूल्हा-चौका करने के लिए हुआ है. ऐसे लोग उन्हें अपनी छोटी सोच की दीवार में जकड़कर रखते हैं और लड़कियों की उम्र चूल्हा-चौका करने में बीत जाती है. वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पातीं और खोखले रिवाजों के लिए अपनी इच्छाओं का बलिदान कर देती हैं. भारत में महिलाओं के लिए अनेकों कानून बनने के बावजूद इसका फायदा हर महिला नहीं उठा पाती. शायद इसलिए क्योंकि उनका घर की चार दीवारी से निकलकर यहां तक पहुंचना मुश्किल होता है और जानकारी के आभाव में वह कुछ कर नहीं पातीं. महिलाओं को अपना जीवन अपने अनुसार जीने का पूरा हक है. कोई उनके साथ जोर जबरदस्ती नहीं कर सकता.

लेकिन कुछ जगहों पर आज भी महिलाओं को पैर की जूती समझा जाता है. उन्हें केवल घर का काम करने और बच्चा पैदा करने की मशीन समझा जाता है. आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर महिलाओं की स्थिति जानकर आपको दया आ जायेगी.

पति के जूते से पानी पीती हैं महिलाएं

दरअसल, राजस्थान के भीलवाड़ा इलाके में आज भी महिलाओं को वहां के पुरुष अपने पैरों की जूती समझते हैं. वहां के लोग आज भी अंधविश्वास पर यकीन रखते हैं और अंधविश्वास में ही जी रहे हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि भीलवाड़ा की महिलाएं पीने के लिए गिलास का नहीं बल्कि पति के जूते का इस्तेमाल करती हैं. जी हां, आपने सही सुना. प्यास लगने पर वहां की महिलाएं अपने पति के जूते में पानी डालकर पीती हैं. ऐसा करने की वजह जब आप जानेंगे तब आपको अपने कानों पर यकीन नहीं होगा. भीलवाड़ा में बंकाया माता मंदिर नाम का एक मशहूर मंदिर है. इस मंदिर पर वहां के लोगों की अटूट आस्था है. इस मंदिर में पुजारी भूत-प्रेत भगाने के नाम पर महिलाओं के साथ क्रूरता की हद पार कर देते हैं. इस मंदिर में महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों को देखकर आपकी रूह कांप जायेगी.

पुजारी करते हैं महिलाओं को प्रताड़ित

यहां के पुजारी भूत भगाने के नाम पर महिलाओं पर जुर्म ढाते हैं और उनके साथ शर्मनाक हरकतें भी करते हैं. पुजारी लोग महिलाओं के सिर पर उनके पतियों के गंदे जूते रखवाकर उन्हें मीलों चलवाते हैं. महिलाओं को भी मजबूरी में यह सब करना पड़ता है. उन्हें अपने पतियों के गंदे जूतों को मुंह में दबाकर गांव की गलियों से गुजरने को कहा जाता है. गांव के लोग उन्हें देखकर हंसते हैं और ठहाके लगाते हैं. अब आप अंदाज़ा लगा लीजिये कि इस गांव में महिलाओं की स्थिति क्या होगी. सुनने में तो यह भी आता है कि कुछ पुरुष अपनी पत्नियों को जबरदस्ती इस गांव में ले आते हैं ताकि वह उनसे बदला ले सकें और उन्हें उनकी असली जगह याद दिला सकें. अब आप ही बताइए क्या वाकई ये 21वीं सदी है?