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राजनीति में रजनीकांत का चलेगा जादू या होंगे फेल, पढ़िये ये रिपोर्ट

मिलनाडु: जब भी कोई कलाकार राजनीति में कदम रखता है तो उसके लिए सबसे पहली और बड़ी चुनौती यही होती है कि वो अपनी लोकप्रियता को आखिर कैसे बरकरार रखें? आमतौर पर यही देखा जाता है कि फिल्मी दुनिया या कलाकारी की दुनिया से राजनीति में कदम रखने वालों को थोड़ा सा फायदा तो मिलता ही है। जी हां, साउथ फिल्मोंं के सुपरस्टार रजनीकांंत की लोकप्रियता कितनी है? इस बात से तो शायद ही कोई बेखबर होगा? लेकिन यहां पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या रजनीकांत की लोकप्रियता ही राजनीति में उनका जादू चला पाएगी?

याद दिला दें कि 2016 में जयललिता प्रकरण के बाद से ही तमिलनाडु की राजनीति संभल नहीं पा रही है। ऐसे में एक के बाद एक विवाद तमिल की राजनीति में देखने को मिल रहा है। खैर, उम्मीद तो यह भी लगाई जा रही है कि अगर सबकुछ सही रहा तो 2021 में तमिल में विधानसभा चुनाव होंगे। अब अगर चुनाव होगा तो रजनीकांत के पास यह सुनहरा मौका होगा खुद को सीएम के रूप में देखने का।

rajnikant in politics

बताते चले कि रजनीकांंत ने 2017 के आखिरी में राजनीति में आने का ऐलान किया था, जिसके बाद से उनके फैन्स में अलग ही जोश दिखने को मिल रहा है। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञोंं का मानना है कि रजनीकांत एक बेहतर नेता साबित हो सकते हैं। एक सर्वे के अनुसार तमिलनाडू की जनता की दूसरी पसंद बन चुके हैं रजनीकांत, लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पहली पसंद कौन है?

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रजनीकांत को इस शख्स से मिल सकती है कड़ी टक्कर

बता दें कि डीएमके नेता एमके स्टालिन को मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद बताया गया है, ऐसे में रजनीकांत के पास अभी तीन साल का वक्त है। अगर सुपरस्टार रजनीकांत इन तीन सालोंं में तमिल की राजनीति में अपनी पकड़ बना ली तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में उनके सीएम बनने का सपना पूरा हो सकता है। सर्वे पर गौर किया जाए तो रजनीकांत के लिए यह राह आसान नहीं होने वाली है, क्योंंकि सर्वे में डीएमके की सत्ता में वापसी दिख रही है।

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बहरहाल, रजनीकांत युवाओं की पहली पसंद बताए जा रहे हैं, ऐसे में रजनीकांत के लिए ये खबर थोड़ी राहत भरी हो सकती है। खैर, जो भी हो रजनीकांत का सिक्का राजनीति में चलेगा या नहीं ये तो वक्त ही बताएगा।

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